Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

मंगलवार, 5 मई 2015

खराब नतीजा असफलता नहीं होता

योग्यता से ज्यादा महत्वपूर्ण है भूमिका 
ग्रुप प्रोजेक्ट के नतीजे उम्मीद के मुताबिक न हों तो निराशा स्वभाविक है। यह मुश्किल का कारण तब बनता है जब हम इसके लिए केवल खुद को जिम्मेदार मानने लगते हैं। हम खुद को महत्वपूर्ण समझने लगते हैं, जबकि इससे परफॅामेंस पर बुरा असर पड़ता हैं। जानिए इससे बचने के बारे में...


  •  वर्कप्लेस पर हर काम आपके चलते ही नहीं होता। न ही हर नतीजा आपकी उम्मीदों के मुताबिक हो सकता है। 
  •  दूसरों के काम में मदद करें। महत्वपूर्ण यह है कि संस्थान के लक्ष्यों को हासिल करने में आप कैसे मदद कर रहे हैं।
  • खराब नतीजोें के बारे में सोचकर उसके असली कारणों की अनदेखी कर रहे हैं। यह जानकर ही दोबारा गलती करने से बचेंगे।
  •  नतीजों को देखने का अपना नजरिया बदल सकते है। बेहतर नतीजों के लिए क्या  करना जरूरी है, इसका रास्ता ढूंढ सकते हैं।


सोमवार, 4 मई 2015

गलती के लिए बदला नहीं माफी दीजिए

अक्सर हम दूसरों के व्यवहार से परेशान होते हैं जबकि इनपे हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। जानिए इससे बचने के तरीकों के बारे मंे...

  •  दूसरो का व्यवहार और काम करने का तरीका उनके अपने लक्ष्यों के अनुरूप होता हैं। इसे बदलने की बजाय अपने व्यवहार को बेहतर कीजिए।
  • आपकी कामयाबी या नाकामयाबी के लिए आप खुद ही जिम्मेदार हैं। इसके लिए दूसरों को दोष देने का कोई फायदा नहीं।
  • हालात या परिस्थतियों के बारे में शिकायत करने से भी कुछ हासिल नहीं होता। उनसे मुकाबले के लिए तैयारी करना बेहतर विक्लप है। 
  • कोई जानबूझकर परेशान करने की कोशिश कर रहा है तो भी उसे माफ कर दीजिए। बदला लेने की कोशिश में आप लक्ष्य से भटक जाएंगे।


रविवार, 3 मई 2015

हेल्थ मैनेजमेंट: एन्जाइना के लक्षण और कारण

छाती में दर्द के कई कारण इन्हें पहचानना सीखिए: डाॅ. पीयूष जैेन (डिपार्टमेंट आॅफ प्रीवेंटिव कार्डियोलाॅजी, फोर्टिस हाॅस्पिटल, दिल्ली।)
छाती के दर्द यानी एन्जाइना की बीमारी। दिल को पर्याप्त मात्रा में खून न पहुंचने के कारण यह समस्या होती है। कोरोनरी आर्टरिज़ में ब्लाॅकेज इसका है। लेकिन हर तरह के छाती के दर्द को एन्जाइना नहीं कह सकते। एन्जाइना को पहचानने के लिए ध्यान रखिए-

शनिवार, 2 मई 2015

नौकरी में निखारा हुनर, उधार लेकर शुरू की अपनी कंपनी


1926 में हेंस ने पहली वाॅटरप्रूव रिस्ट वाॅच ‘ओयेस्टर ‘ बनाई। इसके बाद 1945 में ऐसी हाथ घड़ी बनाई जिसकी तारीख ख्ुाद-व -खुद बदल जाती थी। दो टाइम जोन को बताने वाली पहली रिस्ट वाॅच का श्रेय भी हेंस को जाता है।
आज रोलेक्स दुनिया का सबसे बड़ा लग्जरी वाॅच ब्रैंड है। यह हर साल 6 लाख 50 हजार से 8लाख तक घडि़या बनाती है। इसका सालाना रेवेन्य 3 बिलियन डाॅलर ( करीब 186 अरब रूपए ) है। 
जेम्स बाॅण्ड सीरीज की शुरूआत फिल्मों में इस मशहूर किरदार ने रोलेक्स की घड़ी  पहनी है। शीन काॅनेरी से शुरू हुआ यह सिलसिला पीयर्स ब्रासनन तक चला। 
हेंस विल्सडोर्फ: जन्म: 22 मार्च 1881, जर्मनी ,संस्थापक : रोलेक्स 
हेंस के बचपन में ही उनकी मां की मौत हो गई थी। मां की मौत का सदमा पिता बर्दाश्त नहीं कर सके नतीजतन वे भी चल बसे। यह 1893 की बात है। उस वक्त हेंस की उम्र 12 साल थी। हेंस के अंकल ने उसके पिता के बिजनेस को बेचकर उनका कर्ज चुकाया। बचे हुए पैसो से बच्चों की बेहतर शिक्षा का बंदोबस्त किया। तीन भाई-बहनों में हेंस अपने माता-पिता की दूसरी संतान थे। बचपन में विल्सडोर्फ की रूचि गणित और भाषा में थी इससे उन्हें विभिन्न देशों की यात्रा करने और वहां काम करने में मदद मिली।
शुरू में उन्होंने दुनियाभर में मोतियों का निर्यात करने वाली एक फर्म में काम किया, जहां वैश्विक कारोबार के गुर सीखे। हेंस ने इस शुरूआती अनुभव का असर अपने पूरे जीवन पर कुबूल किया है। 1931 के एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि अगर मैंने अपनी शुरूआत निर्यात की बारीकियों को सीखने से न की होती, तो आज मैं वो नहीं होता, जो हूं।
20वीं सदी की शुरूआत के साथ ही हेंस के भीतर बैठे घड़ी के कारोबारी की यात्रा शुरू होती है। मोतियों की फर्म का काम छोड़कर महज 19 साल की उम्र में वे स्विट्जरलैंड चले गए। वहां सन् 1900 में हेंस ने उस वक्त की सबसे बड़ी घड़ी निर्यातक कंपनी कुनो कोर्टन में काम शुरू किया। यहां उन्हें दुनिया के विभिन्न हिस्सों के साझेदारों के साथ अंग्रेजी में पत्र व्यवहार करने का काम मिला। 80 फ्रेंक प्रति माह की सेलरी पर। इस वक्त जिनेवा के साथ ला चाउक्स दे फोन्ड्स घड़ी निर्माता कंपनियों का हब था। यहां हेंस की मुलाकात इस इंडस्ट्री के कई दिग्गजों से हुई।ं इन मुलाकातों में मिलीं सिखों से उन्हें रोलेक्स कंपनी की स्थापना में बड़ी मदद मिली।
1903 में हेंस ने स्विट्जरलैंड छोड़ दिया और लंदन आ गए। इस वक्त उनके दिमाग में यह साफ था कि क्या करना है। वे घड़ी निर्माता बनना चाहते थे। लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। अपने सपने को कुछ दिनों के लिए मुल्तवी कर उन्होंने लंदन में भी एक घड़ी कंपनी में काम किया। अपने चार-पांच साल के अनुभव से हेंस ने एक बात समझ ली थी कि सभी कंपनीयां घड़ी निर्मान के पुराने और स्थापित मानदंडों पर ही चल रही हैंै। कोई भी नई डिजाइन और जरूरतों के हिसाब से बदलाव नहीं कर रहा है। हेंस ने इसे अपनी ताकत बनाया। 
वे जल्द से जल्द अपना काम शुरू करना चाहते थे। जमा पूंजी उनके पास नहीं थी और बाजार से उन्हें कोई रकम नहीं मिल सकती थी। तब उन्होंने अपनी बहन से उधार लिया और जीजा अल्फ्रेड डेविस को पार्टनर बनाया। 24 साल की उम्र में 1905 में उन्होंने विल्सडोर्फ एंड डेविस नाम से लंदन में घड़ी निर्माण कंपनी शुरू की।
उनकी पहली घड़ी की खासियत थी एक ट्रेवलिंग वाॅच, इसे पोर्टफोलियो वाॅच कहा जाता था। हेंस ने इसमें उच्च गुणवत्ता वाले लैदर का इस्तेमाल किया था। लेकिन यह हाथ में बांधने वाली घड़ी नहीं थी। जबकि हेंस समझ चुके थे कि आने वाला भविष्य हाथ में बांधने का ही है। एक जगह उन्होंने लिखा है कि उनका विचार है कि पाॅकेट वाॅच के बजाय रिस्ट वाॅच एक बेहतर ट्रेड होगा। इसके पीछे सोच थी कि यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के हाथों में पहुंचेंगी।
इसके बाद हेंस ने दुनियाभर की यात्राएं शुरू कीं। 2 जुलाई 1908 को हेंस ने स्विट्जरलैंड में रोलेक्स ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड कराया था। इस बीच 1915 ब्रिटिश सरकार ने लग्जरी उत्पादों पर निर्यात ड्यटी बढ़ाकर 33 प्रतिशत कर दी। इसके दुष्प्रभावों को भांपकर हेंस ने 1919 में एक आॅफिस स्विट्जरलैंड में शुरू किया। 1920 के बाद वे स्विट्जरलैंड में ही बस गए।

शुक्रवार, 1 मई 2015

जिंदगी के हर रास्ते पर आगे रहने के तरीके

डाॅ. करण ठाकुर: जीएम- आॅपरेशंस एंड पब्लिक अफेयर्स, अपालो अस्पताल ।
ज्यादातर लोग एक वक्त पर कई काम करते हैं। इससे जिंदगी की गति तेज़ लगती है, लेकिन दिमाग इन चीज़ों को जल्दी प्रोसेस नहीं कर पाता है। कुछ लोग ऐसे हैं जो काम को निजी जीवन से अलग नहीं कर पाते हैं। इससे दिमाग हमेशा काम में ही उलझा रहता है। इसका एक ही हल है। बिज़ी वर्क लाइफ के प्रेशर और डिमांड को मैनेज करने से सकारात्मक नतीजे मिलेंगे। ऐसा करना आसान नहीं है, लेकिन इन टिप्स को फाॅलो करने से फायदा होगा...
यह सिर्फ एक जाॅब है, जिंदगी नहीं: जाॅब में सबसे अच्छा परफॅार्म करके आगे बढ़ने की सोच अच्छी है, लेकिन जाॅब को जरूरत से ज्यादा अहमियत देना गलत है। ऐसा करने से आगे बढ़ जाएंगे, लेकिन स्वास्थ्य को नुकसान होगा।
रूटीन बनाना जरूरी: सुबह उठते ही स्मार्टफोन उठाकर ईमेल चैक करने की जरूरत नहीं है। घर और काम को अलग करने के लिए एक रूटीन बनाएं। घर पर हो तो ऐसे काम करिए जो इंटरेस्ट के हैं। जैसे अखबार पढ़ना, गार्डनिंग करना या कोई स्पोर्ट खेलना आदि। आॅफिस में भी पूरा दिन ईमेल चैक करने की जरूरत नहीं है। एक वक्त निर्धारित करिए जब आप ईमेल्स चैक करेंगे।
दोस्त बनाइए: आॅफिस में कुछ दोस्त हैं तो अच्छा है। उनके साथ गाॅसिप सेशन बनाए ऐसा काम के दौरान न करें, लेकिन काम पूरा होने के बाद। सेशन में अपनी समस्याओं की चर्चा करिए। इसी तरह से आॅफिस के लोगों के साथ बाहर जाने से भी तनाव कम होगा।
मजबूत वर्किग रिलेशन: बाॅस के साथ अच्छा वर्किंग रिलेशन जरूरी है। कई बार बाॅस के साथ कम्युनिकेशन गैप होने के कारण तनाव बढ़ने लगता है। कई बाॅस अच्छे होते हैं, लेकिन एक बुरे बाॅस के साथ काम करना गलत साबित होगा। जबकि अच्छे बाॅस के साथ कोई बोरिंग जाॅब भी इंटरेस्टिंग लगेगी।